हिसालू - Himalayan Yellow Raspberry Benefits

Sakshi
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हिसालू - Hisalu Fruit

हिमलायी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए हिसालू प्रकृति का अनमोल उपहार है जिसका स्थानीय निवासी मई-जून की गर्मियों में लुत्फ उठाते हैं.

हिसालू जिसे हिमालयन रास्पबेरी के नाम से भी जाना जाता है, यह हिमालय की ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं में पाई जाने वाली एक प्रकार की बेरी है जो अपने मीठे स्वाद और पौष्टिक गुणों के लिए जानी जाती है, दुनियां भर में इसकी लगभग 1700 प्रजातियाँ पाई जाती हैं.

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हिसालू की विशेषताएं

हिसालू एक छोटा, गोल बेरी है जिसका दाना कई छोटे नारंगी कणों के समूह जैसा दिखता है, इसका व्यास लगभग 1 सेंटीमीटर होता है और बीज छोटे और गोल होते हैं.

Hisalu Fruit

हिसालू में विटामिन सी, विटामिन के, फाइबर और एंटीऑक्सिडेंट प्रचुर मात्रा में होते हैं, इसमें कैलोरी और वसा की मात्रा कम होती है.

हिसालू का स्वाद

हिसालू खाने में खट्टा और मीठा होता है, अच्छी तरह से पका हुआ हिसालू बहुत अधिक मीठा होता है, हिसालू का फल इतना कोमल होता है कि हाथ में पकड़ने पर टूट जाता है और जीभ में रखते ही अपनी मिठास के साथ पिघलने लगता है.

हिसालू के लोकप्रिय नाम

भारत के हिमालय क्षेत्र, उत्तराखंड, हिमाचल में हिसालू को अलग-अलग नामों से जाना जाता है, पहाड़ी इलाकों में हिसालू के लोकप्रिय नाम हिसोल, ऐंसेलु, हिसोला, हिसुल, हिसाउव, हिसार, हेंसुल आदि हैं. अंग्रेजी भाषा में इसे Himalayan Yellow Raspberry या Himalayan Golden Raspberry कहा जाता है.

हिसालू की प्रकृति

हिंसालू की अधिकांश प्रजातियाँ झाड़ीदार, शाखित, काँटेदार और रोमयुक्त होती हैं इस क्षुप की ऊंचाई लगभग 1-3 मीटर होती है.

हिसालू - Hisalu Fruit

पूरी तरह से पकने के बाद कंटीली झाड़ी से हिसालू सावधानी से निकाला जाता है, इसमें सफेद रंग के फूल और नारंगी रंग के फल लगते हैं.

हिसालू भारत और विश्व में कहां कहां पाया जाता है

हिसालू भारत में मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में पाया जाता है, इन राज्यों के अलावा, हिसालू भारत में लगभग सभी हिमालयी राज्यों में उच्च क्षेत्रों में पाया जाता है, इनमें जम्मू और कश्मीर, सिक्किम, मणिपुर, मेघालय, नागालैंड, मिजोरम और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह शामिल हैं.

विश्व में, हिसालू नेपाल, भूटान, पाकिस्तान, पोलैण्ड, सर्बिया, रूस, मेक्सिको, वियतनाम आदि देशों में पाया जाता है.

हिसालू पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव

हिसालू एक ठंडे जलवायु की बेरी है, जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में वृद्धि हो रही है इससे हिसालू की उपलब्धता में परिवर्तन आ रहा है.

पहले हिसालू 2500 से 7000 फीट की ऊंचाई पर पाया जाता था, लेकिन अब यह अधिक ऊंचाई पर पाया जाने लगा है, जलवायु परिवर्तन के कारण हिसालू की उपलब्धता में भारी कमी देखी गई है.

हिसालू में पाए जाने वाले पोषक तत्व

हिसालू में कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन, जिंक, पोटैशियम, सोडियम, एस्कॉर्बिक एसिड (विटामिन सी) और एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं.

हिसालू में विटामिन सी 32 प्रतिशत, फाइबर 26 प्रतिशत और मैंगनीज 32 प्रतिशत तक पाया जाता है, इसमें शुगर की मात्रा 4 फीसदी तक ही पाई जाती है.

हिसालू के औषधीय गुण Medicinal Properties of Hisalu in Hindi

हिसालू (Rubus ellipticus) एक औषधीय पौधा है यह पौधा अपने स्वादिष्ट और पौष्टिक फलों के लिए जाना जाता है, हिसालू के औषधीय लाभ निम्नलिखित हैं.

एंटीऑक्सीडेंट गुण

हिसालू अपने एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए भी जाना जाता है, ये गुण शरीर को मुक्त कणों से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करते हैं. मुक्त कण शरीर में उत्पन्न होने वाले अणु होते हैं जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं, विटामिन सी, फ्लेवोनोइड और कैरोटीनॉयड जैसे एंटीऑक्सिडेंट मिलकर शरीर को मुक्त कणों से बचाने में मदद करते हैं.

इम्यूनिटी बढ़ाने बढ़ाने में

हिसालू में विटामिन सी और अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्व होते हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में मदद करते हैं, विटामिन सी एक आवश्यक पोषक तत्व है जो श्वेत रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में मदद करता है और शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करता है.

सूजन कम करने के लिए

हिसालू में एंटी-हाइपरटेंसिव गुण होते हैं, ये गुण रक्तचाप को कम करने में मदद करते हैं, इसमें मौजूद फ्लेवोनोइड्स और एंटीऑक्सिडेंट रक्त वाहिकाओं को आराम देने में मदद करते हैं, जिससे रक्त प्रवाह में सुधार होता है और रक्तचाप कम होता है.

एक अध्ययन में पाया गया कि हिसालू अर्क के सेवन से उच्च रक्तचाप वाले लोगों में सिस्टोलिक रक्तचाप 10.6% और डायस्टोलिक रक्तचाप 7.8% कम हो गया, हिसालू का अर्क एक सुरक्षित और प्रभावी प्राकृतिक उपाय है जो उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है.

कैंसर से बचाव

हिसालू में एंटी-कैंसर गुण होते हैं जो कैंसर के विकास को रोकने में मदद कर सकते हैं, अध्ययनों से पता चलता है कि हिसालू के अर्क में कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने और उन्हें खत्म करने की क्षमता होती है.

पाचन में सुधार

हिसालू (Himalayan Raspberry) में फाइबर होता है जो पाचन में सुधार करने में मदद करता है, फाइबर भोजन को पचाने में मदद करता है और कब्ज को रोकता है.

रक्तचाप को कम करने में

हिसालू में एंटी-हाइपरटेंसिव गुण होते हैं, इन गुणों के कारण यह रक्त वाहिकाओं को आराम देने और रक्त प्रवाह में सुधार करने में मदद करता है, जिससे रक्तचाप कम होता है.

मधुमेह नियंत्रण के लिए

हिसालू में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट रक्त वाहिकाओं को क्षति से बचाने के अलावा इंसुलिन के प्रति शरीर की संवेदनशीलता को भी बढ़ाने में मदद करते हैं, यह दोनों पोषक तत्व रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं.

हिसालू का उपयोग कैसे करें

हिसालू को विभिन्न तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसे कि ताजा, सूखे या जूस के रूप में, इसे अन्य खाद्य पदार्थों में भी जोड़ा जा सकता है, जैसे कि सलाद, स्मूदी आदि.

हिंसालू एक सुरक्षित और प्रभावी औषधीय फल है जो कई स्वास्थ्य लाभों के लिए जाना जाता है, हालांकि किसी भी नए औषधीय फल का सेवन करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर करना चाहिए.

हिसालू के नुकसान

एलर्जी - हिसालू से कुछ लोगों को एलर्जी की समस्या हो सकती है, एलर्जी के लक्षणों में खुजली, लालिमा, सूजन और सांस लेने में परेशानी शामिल हो सकती है, अगर आपको हिसालू खाने के बाद इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें.

पेट की समस्याएं - हिसालू में फाइबर की मात्रा अधिक होती है जिससे कुछ लोगों में दस्त या पेट फूलने जैसी पेट संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, यदि आपको हिसालू खाने के बाद इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देता है, तो इसका सेवन कम करें या इसे पूरी तरह से छोड़ दें.

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निष्कर्ष: Himalayan Yellow Raspberry

हिसालू एक स्वादिष्ट और पौष्टिक फल है जो हिमालय की ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं में पाया जाता है, यह फल अपने मीठे स्वाद, पौष्टिक गुणों और औषधीय लाभों के लिए जाना जाता है.

हिसालू एक महत्वपूर्ण स्थानीय संसाधन है जो हिमालयी क्षेत्रों के लोगों के लिए आय का एक स्रोत हो सकता है, यदि इस फल को संरक्षित करने के लिए स्थानीय समुदायों को इसकी खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए तो स्थानीय लोगों के लिए आय के स्रोत उपलब्ध हो सकेंगे.

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