पर्वत किसे कहते हैं तथा यह कितने प्रकार के होते हैं?

Sandeep
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पर्वत पृथ्वी की सतह पर विशालकाय ऊंचाई वाले क्षेत्र होते हैं जो बादलों से भी ऊंचे होते हैं, इन ऊंचाइयों पर, तापमान इतना कम होता है कि वर्षा बर्फ के रूप में होती है, जिसके कारण इन क्षेत्रों में सदैव बर्फ से ढकी नदियाँ और हिमनद बहते रहते हैं.

यह लेख पर्वत किसे कहते हैं और पर्वत कितने प्रकार के होते हैं, पर्वत निर्माण के मुख्य सिद्धांत, पर्वतों की मुख्य विशेषताएँ, महत्व तथा विश्व की प्रमुख पर्वत श्रृंखलाओं पर प्रकाश डालता है, कृप्या लेख में अंत तक बने रहें.

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पर्वत किसे कहते हैं (Parvat Kise Kahate Hain)

पर्वत ऐसे विशिष्ट उच्चभूमि हैं, जिनमें एक या एक से अधिक शिखर होते हैं. इनका ढाल तीव्र तथा शिखर का क्षेत्र संकुचित होता है. निचले भाग में इसका ढाल 25° से 35° के बीच होता है, लेकिन चोटियों के निकट ढाल अधिक सघन या तीव्र होता है. ये पृथ्वी की सतह पर द्वितीयक क्रम के उच्चावच हैं, जो निकटवर्ती क्षेत्रों की तुलना में सामान्यतः 1,000 मी. से अधिक ऊँचे होते हैं.

पर्वत किसे कहते हैं

पर्वत शिखर :- किसी पर्वत के सर्वोच्च नुकीले भाग, जो आस-पास के प्रदेश से तथा पर्वत के अन्य भागों से ऊँचा हो, उसे पर्वत शिखर (Mountain Peak) कहा जाता है.

निम्न ऊँचाई वाले पर्वत को पहाड़ी कहते हैं अर्थात् पर्वतों के वे लघु रूप जिनका क्षेत्रीय विस्तार कम तथा ऊँचाई 1,000 मी. से कम होती है, पहाड़ी कहलाते हैं. किसी पर्वत या पहाड़ी का सर्वोच्च भाग चोटी अथवा पर्वत शिखर (Mountain peak) कहलाता है.

पर्वत निर्माण के प्रमुख सिद्धांत (Parvat Nirman Ke Pramukh Siddhant)

पर्वत निर्माण के चार प्रमुख सिद्धांतों का विस्तृत विवरण इस प्रकार है -

संक्षेपण परिकल्पना

यह सिद्धांत मानता है कि पृथ्वी ठंडी होने के कारण सिकुड़ रही है, जिससे पर्वतों का निर्माण होता है, पृथ्वी की सतह के ठंडे होने से ठोस होने के बाद भी, नीचे की सतह सिकुड़ती रहती है, यह सिकुड़न ऊपरी सतह पर दबाव डालती है, जिसके कारण पर्वतों का निर्माण होता है.


प्लेट टेक्टोनिक्स

यह सिद्धांत पर्वत निर्माण का सबसे व्यापक रूप से स्वीकृत सिद्धांत है, यह मानता है कि पृथ्वी की सतह टेक्टोनिक प्लेटों से बनी है जो लगातार गतिमान हैं, जब ये प्लेटें एक दूसरे से टकराती हैं, तो वे टकराव के क्षेत्र में पर्वतों का निर्माण करती हैं.


भूसन्नति सिद्धांत

यह सिद्धांत मानता है कि पर्वत उन क्षेत्रों में बनते हैं जहां तलछट जमा होकर भूसन्नति का निर्माण करते हैं, भूसन्नति में जमा तलछट का भार धीरे-धीरे बढ़ता जाता है, जिसके कारण भूसन्नति धीरे-धीरे धंसने लगती है, धंसने के कारण तलछट में दबाव बढ़ता जाता है, जिसके कारण वे मोड़ने और मुड़ने लगते हैं, इस प्रक्रिया से पर्वतों का निर्माण होता है.


अग्निज सिद्धांत

यह सिद्धांत मानता है कि पर्वत ज्वालामुखी विस्फोटों से निकलने वाले मैग्मा के ठंडा होने और जमने से बनते हैं. मैग्मा पृथ्वी की सतह पर निकलकर ज्वालामुखी का निर्माण करता है, जब यह ज्वालामुखी लावा ठंडा होता है, तो यह पर्वतों का निर्माण करता है.


अन्य सिद्धांत

इन प्रमुख सिद्धांतों के अलावा, पर्वत निर्माण के कुछ अन्य सिद्धांत भी हैं, जैसे कि -


अल्पकालिक सिद्धांत - यह सिद्धांत मानता है कि पर्वतों का निर्माण भूकंपों और अन्य भूगर्भीय गतिविधियों के कारण होता है.

हिमनद सिद्धांत - यह सिद्धांत मानता है कि हिमनदों की गतिविधियों के कारण पर्वतों का निर्माण होता है.

पर्वतों के प्रकार (Parvat Kitne Prakar Ke Hote Hain)

अनेक भूगोलवेत्ताओं ने पर्वतों का अध्ययन कर पर्वतों का अपने-अपने अनुसार विभाजन किया है. परन्तु मुख्यतः पर्वत के तीन प्रकार होते हैं - (1) आयु के आधार पर, (2) उत्पत्ति के आधार पर तथा (3) निर्माण के आधार पर, जिनका वर्णन इस प्रकार है -

आयु के आधार पर

आयु के आधार पर पर्वत को दो मुख्य भागों में बांटा गया है जो निम्नलिखित हैं -


1 - प्राचीन पर्वत - जिन पर्वतों का निर्माण तीन करोड़ वर्ष पूर्व महाद्वीपीय विस्थापन युग से पूर्व हुआ था, उन्हें प्राचीन पर्वत कहते हैं. जैसे - पेनाइन (यूरोप), एल्प्सियन (अमेरिका), अरावली (भारत).

2 - नूतन पर्वत - जिन पर्वतों का निर्माण तृतीय युग में प्लेटो के अभिसरण से हुआ, उन्हें नवीन वलित पर्वत कहते हैं. जैसे - हिमालय, रॉकी, इंडीज, आल्प्स आदि.

उत्पत्ति के आधार पर

उत्पत्ति के आधार पर पर्वतों को मुख्यतः चार भागों में बाँटा गया है जो निम्नलिखित हैं.


1 - वलित या मोड़दर पर्वत - इन पर्वतों का निर्माण पृथ्वी के विवर्तनिक बलों जैसे दबाव, संपीड़न, उभार आदि के कारण चट्टानों के स्तर में व्यापक मूल्यांकन के विकास के कारण 30 मिलियन वर्ष पूर्व हुआ था.

हिमालय (भारत), आल्प्स (यूरोप), रॉकीज (उत्तरी अमेरिका), एंडीज (दक्षिण अमेरिका) वलित पर्वतों के उदाहरण हैं.

2 - ब्लॉक, अवरोधी या खंड पर्वत - सतही भागों में दरारों या दोषों के कारण सतह का कुछ भाग ऊपर उठ जाता है और कुछ नीचे धंस जाता है. जो भाग ऊपर की ओर उठता है उसे ब्लॉक पर्वत तथा मध्य में धंसे हुए भाग को रिफ्ट घाटी कहा जाता है. इन पर्वतों की सतह सिर्फ समतल होती है.

वोसगेस (फ्रांस) तथा ब्लैक फॉरेस्ट (जर्मनी), विंध्याचल और सतपुड़ा (भारत) ब्लॉक पर्वतों के उदाहरण हैं.

नोट :- जब दो दरारों के बीच की भूमि नीचे धंस जाती है तो भ्रंस घाटी का निर्माण होता है, राइन नदी घाटी (यूरोप), भारत में नर्मदा नदी, अफ्रीका की सबसे बड़ी भ्रंश घाटी, पाकिस्तान में साल्ट रेंज, भ्रंश घाटियों के उदाहरण हैं.

3 - ज्वालामुखी पर्वत - इन पर्वतों का निर्माण ज्वालामुखी से निकलने वाली मिट्टी, लावा आदि पदार्थों के जमाव से होता है, इस पर्वत की आकृति संकुनुमा तथा इसके ऊपरी भाग में किपनुमा गड्ढा होता है जिसे क्रेटर कहा जाता हैै.

माउंट फुजियामा (जापान), वेसुवियस (इटली), चिम्बोराजो और कोटोपैक्सी (भारत दक्षिण अमेरिका), चिली का अकानकुआ, हवाई द्वीप समूह का मोना लोहा पर्वत, बर्मा का पोपा ज्वालामुखी पर्वतों के उदाहरण हैं.

4 - अवशिष्ट पर्वत - अपरदन शक्तियों द्वारा पर्वतों के अत्यधिक अपरदन के कारण ये कटकर नीचे हो जाते हैं, इसलिये इन्हें घर्षित या अवशिष्ट पर्वत कहते हैं.

वर्तमान समय के वलित पर्वत भी आगे चलकर नदी, हिमनद, वायु, तुषार द्वारा कटकर तथा घिसकर निम्न पर्वतों का रूप धारण कर लेते हैं.

विंध्याचल, अरावली, सतपुड़ा, नीलगिरी, पूर्वी घाट, पश्चिमी घाट (भारत), हाइलैंड्स (स्कॉटलैंड), कैट्सकिल (न्यूयॉर्क), सिएरा (स्पेन) आल्प्स (अमेरिका) अवशिष्ट पर्वतों के उदाहरण हैं.

निर्माण के आधार पर

1 - प्री-कैरिबियन पर्वत - इन पर्वतों का निर्माण प्रारंभिक कैम्ब्रियन युग में हुआ था, जैसे कि अरावली (गोंडवाना लैंड) और स्कैंडिनेविया (अंगारा लैंड) आदि.


2 - कैलिडोनियम पर्वत - इन पर्वतों का निर्माण लगभग 320 मिलियन वर्ष पहले डेवोनियन और सिलुरियन युग में हुआ था, जैसे कि उत्तरी अमेरिका के एपलाचियन पर्वत और यूरोप में स्कॉटलैंड, स्कैंडिनेविया और उत्तरी आयरलैंड के पर्वत.

3 - हर्सीनियम पर्वत - इन पर्वतों का निर्माण उत्तर पूर्वी काल में हुआ था, जैसे कि पेटागोनिया (दक्षिण अमेरिका), ड्रेकेन्सबर्ग (अफ्रीका), और ब्लैक फॉरेस्ट (जर्मनी) आदि.

4 - अल्पाइन पर्वत - इन पर्वतों का निर्माण करीब 3 करोड़ साल पहले हुआ था और इसमें अधिकांश नवीन वलित पर्वत शामिल हैं, जैसे कि हिमालय, आल्प्स, रॉकीज, एंडीज, और पायरेनीज.

पर्वत की मुख्य विशेषताएं  (Parvat Ki Mukhya Visheshtayen)

पर्वत पृथ्वी की सतह पर ऊंचे, उभरे हुए भूभाग होते हैं, वे विभिन्न आकारों और आकारों में पाए जाते हैं और दुनिया भर में पाए जा सकते हैं, पहाड़ों की कुछ मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं.

ऊंचाई - पहाड़ों को आमतौर पर कम से कम 1,000 फीट (300 मीटर) ऊंचा माना जाता है, हालांकि, विभिन्न स्रोतों के आधार पर पहाड़ों की ऊंचाई की सटीक परिभाषा भिन्न हो सकती है.

ढलान - पहाड़ों में खड़ी ढलान होती है, जो उन्हें आसपास के परिदृश्य से अलग करती है, ढलान चट्टानी, रेतीले या घास से ढके हो सकते हैं.

चोटियां - पहाड़ों में चोटियां होती हैं, जो उनका उच्चतम बिंदु होती हैं, चोटियां तेज या गोल हो सकती हैं, और वे चट्टान या बर्फ से बनी हो सकती हैं.

श्रेणियां - पहाड़ अक्सर पर्वत श्रृंखलाओं में पाए जाते हैं, जो पहाड़ों की एक लंबी, जुड़ी हुई श्रृंखला होती है, पर्वत श्रृंखलाएं सैकड़ों या हजारों मील तक फैल सकती हैं.

गठन - पहाड़ तीन मुख्य तरीकों से बनते हैं - प्लेट टेक्टोनिक्स, ज्वालामुखी और क्षरण. प्लेट टेक्टोनिक्स पृथ्वी की पपड़ी में प्लेटों की गति के कारण होता है, जो पहाड़ों को ऊपर उठाता है, ज्वालामुखी तब बनते हैं जब लावा पृथ्वी की पपड़ी में दरारों से निकलता है, जो पहाड़ों का निर्माण कर सकता है. क्षरण तब होता है जब हवा, पानी और बर्फ जैसी प्राकृतिक शक्तियां चट्टान को तोड़ देती हैं, जिससे पहाड़ बनते हैं.

जलवायु - पहाड़ों में अक्सर आसपास के क्षेत्रों की तुलना में ठंडी जलवायु होती है, ऐसा इसलिए है क्योंकि ऊंचाई के साथ तापमान गिरता जाता है.

वनस्पति - पहाड़ों में विभिन्न प्रकार की वनस्पतियां पाई जा सकती हैं, जो जलवायु और ऊंचाई पर निर्भर करती है, निचले ऊंचाई पर, पहाड़ों में जंगल हो सकते हैं, उच्च ऊंचाई पर, पेड़ों को झाड़ियों और घास से बदल दिया जाता है.

जीवन - पहाड़ विभिन्न प्रकार के जानवरों का घर हैं, जिनमें स्तनधारी, पक्षी, सरीसृप और उभयचर शामिल हैं, पहाड़ों में पाए जाने वाले जानवर अक्सर ठंडी जलवायु और ऊबड़-खाबड़ इलाके के अनुकूल होते हैं.

पहाड़ मानव गतिविधि के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन हैं, वे खनिज, लकड़ी और ताजे पानी का स्रोत प्रदान करते हैं, पहाड़ मनोरंजन के लिए भी एक लोकप्रिय स्थान हैं, जैसे कि लंबी पैदल यात्रा, शिविर और स्कीइंग.

पर्वतों का महत्व (Parvaton Ka Mahatva)

पर्वत पृथ्वी के सबसे महत्वपूर्ण भौगोलिक संरचनाओं में से एक हैं, वे न केवल अपनी सुंदरता और भव्यता के लिए जाने जाते हैं, बल्कि मानव जीवन और पर्यावरण के लिए भी महत्वपूर्ण हैं, जिसकी प्रमुखता इस प्रकार है -

1. प्राकृतिक संसाधनों का भंडार - पहाड़ प्राकृतिक संसाधनों का भंडार हैं, इनमें खनिज, लकड़ी, ताजे पानी, और जैव विविधता शामिल हैं.

2. जल विद्युत ऊर्जा उत्पादन - पहाड़ों से बहने वाली नदियों का उपयोग जल विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए किया जाता है, यह ऊर्जा का एक स्वच्छ और नवीकरणीय स्रोत है.

3. जल के असीम भंडार - पहाड़ों में बर्फ और हिमनदों से नदियां निकलती हैं जो सिंचाई, पेयजल और अन्य घरेलू उपयोगों के लिए पानी प्रदान करती हैं.

4. जलवायु पर प्रभाव - पहाड़ जलवायु को प्रभावित करते हैं, वर्षा पैटर्न को नियंत्रित करते हैं और ठंडी हवाओं को रोकते हैं.

5. मनोरंजन और पर्यटन - पहाड़ मनोरंजन और पर्यटन के लिए लोकप्रिय स्थान हैं, लोग यहां लंबी पैदल यात्रा, चढ़ाई, स्कीइंग और अन्य गतिविधियों का आनंद ले सकते हैं.

6. जैव विविधता - पहाड़ों में विभिन्न प्रकार के पौधे और जानवर पाए जाते हैं, वे कई लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए आवास प्रदान करते हैं.

7. मिट्टी का संरक्षण - पहाड़ मिट्टी के कटाव को रोकने में मदद करते हैं.

8. प्राकृतिक आपदाओं से बचाव - पहाड़ बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं से बचाव में मदद करते हैं.

9. सांस्कृतिक महत्व - पहाड़ों का कई संस्कृतियों में महत्वपूर्ण स्थान है, वे अक्सर धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखते हैं.

विश्व की प्रमुख पर्वत श्रेणियाँ (Vishwa Ki Pramukh Parvat Shrinkhala)

विश्व में अनेक पर्वत श्रेणियाँ हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख श्रृंखलाओं के नाम निम्नलिखित हैं.

हिमालय पर्वत - यह विश्व की सबसे ऊँची पर्वत श्रृंखला है, जो एशिया महाद्वीप में स्थित है, इस श्रृंखला में माउंट एवरेस्ट (8848 मीटर) विश्व का सबसे ऊँचा पर्वत भी शामिल है.

एंडीज पर्वत - यह विश्व की सबसे लंबी पर्वत श्रृंखला है, जो दक्षिण अमेरिका महाद्वीप में स्थित है, इस श्रृंखला में अनेक ऊँचे पर्वत हैं, जिनमें Aconcagua (6961 मीटर) दक्षिण अमेरिका का सबसे ऊँचा पर्वत भी शामिल है.

रॉकी पर्वत - यह उत्तरी अमेरिका महाद्वीप में स्थित एक प्रमुख पर्वत श्रृंखला है, इस श्रृंखला में अनेक ऊँचे पर्वत हैं, जिनमें Mount Elbert (4401 मीटर) उत्तरी अमेरिका का सबसे ऊँचा पर्वत भी शामिल है.

अल्पाइन पर्वत - यह यूरोप महाद्वीप में स्थित एक प्रमुख पर्वत श्रृंखला है, इस श्रृंखला में अनेक ऊँचे पर्वत हैं, जिनमें Mont Blanc (4808 मीटर) पश्चिमी यूरोप का सबसे ऊँचा पर्वत भी शामिल है.

कॉकेशस पर्वत - यह यूरोप और एशिया महाद्वीपों के बीच स्थित एक प्रमुख पर्वत श्रृंखला है, इस श्रृंखला में अनेक ऊँचे पर्वत हैं, जिनमें Mount Elbrus (5642 मीटर) यूरोप का सबसे ऊँचा पर्वत भी शामिल है.

कैलिफोर्निया पर्वत - यह उत्तरी अमेरिका महाद्वीप में स्थित एक प्रमुख पर्वत श्रृंखला है, इस श्रृंखला में अनेक ऊँचे पर्वत हैं, जिनमें Mount Whitney (4421 मीटर) कैलिफोर्निया का सबसे ऊँचा पर्वत भी शामिल है.

एटलस पर्वत - यह उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका में स्थित एक प्रमुख पर्वत श्रृंखला है, इस श्रृंखला में अनेक ऊँचे पर्वत हैं, जिनमें Mount Toubkal (4167 मीटर) उत्तरी अफ्रीका का सबसे ऊँचा पर्वत भी शामिल है.

कार्पेथियन पर्वत - यह मध्य और पूर्वी यूरोप में स्थित एक प्रमुख पर्वत श्रृंखला है, इस श्रृंखला में अनेक ऊँचे पर्वत हैं, जिनमें Gerlachovský štít (2655 मीटर) कार्पेथियन का सबसे ऊँचा पर्वत भी शामिल है.

यूराल पर्वत - यह रूस में स्थित एक प्रमुख पर्वत श्रृंखला है, इस श्रृंखला में अनेक ऊँचे पर्वत हैं, जिनमें Mount Narodnaya (1895 मीटर) यूराल का सबसे ऊँचा पर्वत भी शामिल है.

ट्रांसअंटार्कटिक पर्वत - यह अंटार्कटिका महाद्वीप में स्थित एक प्रमुख पर्वत श्रृंखला है, इस श्रृंखला में अनेक ऊँचे पर्वत हैं, जिनमें Vinson Massif (4892 मीटर) अंटार्कटिका का सबसे ऊँचा पर्वत भी शामिल है.

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Faq Section: Parvat Kise Kahate Hain in Hindi

प्रश्न - पर्वत और पहाड़ में क्या अंतर है?
उत्तर - पर्वत, पहाड़ से ऊँचा और खड़ी ढलान वाला होता है.

प्रश्न: पर्वतों का निर्माण कैसे होता है?
उत्तर: पर्वत टेक्टोनिक प्लेटों की टकराव और गति से बनते हैं, जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं, तो एक प्लेट दूसरी के नीचे खिसक जाती है, इस प्रक्रिया में, चट्टानें ऊपर उठती हैं और पर्वतों का निर्माण होता है.

प्रश्न: पर्वतों का जलवायु पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: पर्वत जलवायु को प्रभावित करते हैं, वे वर्षा को रोकते हैं और तापमान को कम करते हैं, पर्वतों के कारण विभिन्न प्रकार की जलवायु पाई जाती हैं.

प्रश्न: पर्वतों का मानव जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: पर्वतों का मानव जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है, वे प्राकृतिक संसाधनों का भंडार हैं और मनोरंजन और पर्यटन के लिए लोकप्रिय स्थान हैं, पर्वतों के कारण विभिन्न प्रकार की वनस्पतियां और जीव पाए जाते हैं.

निष्कर्ष: पर्वत किसे कहते हैं और पर्वत कितने प्रकार के होते हैं?

पर्वत धरती की सतह पर विशालकाय स्तंभों की तरह खड़े हैं, जो अपनी भव्यता और विविधता से मन मोह लेते हैं, ऊंचे शिखरों से लेकर हरी-भरी घाटियों तक, पर्वत अनेक रहस्यों को समेटे हुए हैं.

इस लेख के माध्यम से आपने जाना कि पर्वत क्या हैं, पर्वत निर्माण के मुख्य सिद्धांत, पर्वतों के प्रकार, पर्वतों की विशेषताएँ, महत्व तथा विश्व की मुख्य पर्वत श्रृंखलाओं के बारे में.

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2 टिप्पणियाँ
  1. Vijay Singh1:06 pm

    बहुत अच्छी जानकारी प्रदान की है आपने जी, धन्यवाद.

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