अच्छे माता-पिता कैसे बनें - जानिए बच्चों का चरित्र निर्माण कैसे करें?

Sandeep
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माता-पिता बनना जीवन का सबसे अनमोल अनुभव है, यह ख़ुशियों से भरपूर होता है लेकिन साथ में ज़िम्मेदारियों का अहसास भी लाता है, बच्चों की उम्र चाहे कुछ भी हो उनकी ज़िम्मेदारियाँ निभाना एक सतत कार्य है.

एक अच्छे माता-पिता बनने के लिए आपको अपने बच्चों को प्यार और समर्थन देने की कला सीखनी होगी, साथ ही उन्हें सही और गलत के बीच का अंतर समझाना होगा, उनमें आत्मविश्वास पैदा करना होगा और उन्हें स्वतंत्र, सफल और दयालु बनने में मदद करनी होगी, अगर आप जानना चाहते हैं कि अच्छे माता-पिता कैसे बनें, अच्छे माता-पिता बनने के लिए आपको क्या क्या करना चाहिए तो आप नीचे दिए गए निर्देशों को ध्यान से पढ़ें.

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बच्चों को प्यार दिखाएं

Acche Mata Pita Kaise Bane

बच्चों को स्नेह व दुलार देना - प्यार और दुलार सबसे अच्छे उपहार हैं जो आप अपने बच्चों को दे सकते हैंं, एक प्यार भरा स्पर्श और गले लगाना आपके बच्चों को यह बताने के लिए पर्याप्त होता है कि वे आपके लिए कितने अनमोल हैं, बच्चों के विकास में शारीरिक संपर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है इसलिए कभी इसकी अनदेखी न करें.

बच्चों की खुशहाली और आत्मविश्वास के लिए माता-पिता का प्यार और समर्थन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, यहाँ कुछ सरल तरीके दिए गए हैं जिनसे आप अपने बच्चों को अपना स्नेह व दुलार दिखा सकते हैं -

अगर आप बच्चों की जिंदगी में खुशियों के रंग भरना चाहते हैं तो बस थोड़ा सा प्यार और दुलार ही काफी है, एक सौम्य आलिंगन, थोड़ा सा प्रोत्साहन, प्रशंसा, अनुमोदन, यहां तक ​​कि एक हल्की सी मुस्कान भी उनमें आत्मविश्वास जगा सकती है और उन्हें खिलने के लिए प्रेरित कर सकती है.

चाहे आप उनसे कितने भी नाराज क्यों न हों, उन्हें हर दिन बताएं कि आप उनसे कितना प्यार करते हैं, यह प्यार उन्हें सुरक्षित और सकारात्मक महसूस कराएगा, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा.

उन्हें प्यार से गले लगाएं और उनके माथे को चूमें, ये छोटे-छोटे स्पर्श उनके मन में प्यार और स्नेह जगाएंगे, उन्हें जन्म से ही प्यार और स्नेह से परिचित कराएंगे.

उनसे बिना शर्त प्यार करें, अपने बच्चों को कुछ ऐसा बनने पर मजबूर न करें, जैसा बनकर ही वे आपका दुलार पा सकते हैं, उन्हें अपनी पसंद और रुचि का रास्ता चुनने दें, उन्हें यह विश्वास दिलाएं कि चाहे कुछ भी हो जाए आपका प्रेम उनके प्रति कभी कम नहीं होगा.

बच्चों को सराहें - बच्चों की प्रशंसा अच्छे माता-पिता बनने की यात्रा का एक अमूल्य हिस्सा है, यह केवल शब्दों तक सीमित नहीं है बल्कि हाव-भाव, स्पर्श और कार्यों के माध्यम से भी व्यक्त की जा सकती है, प्रशंसा, बच्चों को प्रेरित करती है उनमें आत्मविश्वास पैदा करती है और उन्हें जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करती है.

बच्चों के विकास का सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है उत्साह और आत्मविश्वास का निर्माण करना और यह तभी संभव है जब हम उनकी गलतियों पर ध्यान देने के बजाय उनकी उपलब्धियों, प्रतिभाओं और अच्छे व्यवहार पर ध्यान केंद्रित करेंगे, यह दृष्टिकोण बच्चों को यह संदेश देता है कि हम उनमें अच्छाई देखते हैं और उनकी प्रगति को महत्व देते हैं, जब हम उनकी सच्ची प्रशंसा करते हैं तो यह उन्हें प्रेरित करता है और उन्हें बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित करता है.

अपने बच्चों को नकारात्मक प्रतिक्रिया से कम से कम तीन गुना अधिक वास्तविक प्रशंसा देना यह सुनिश्चित करने का एक शानदार तरीका है कि वे आत्मविश्वासी और खुश रहें, गलतियाँ बताना महत्वपूर्ण है लेकिन बच्चों में आत्म-सम्मान और सकारात्मक सोच विकसित करने में मदद करना भी महत्वपूर्ण हैै, विकास के लिए प्रोत्साहन और सराहना समान रूप से महत्वपूर्ण हैं.

केवल बड़ी उपलब्धियों पर ही ध्यान केंद्रित करने के बजाय, छोटी-छोटी सफलताओं का भी जश्न मनाएं, भले ही यह शौचालय का सही उपयोग करना हो या अपनी प्लेट साफ करना हो, हर सकारात्मक कदम को स्वीकार करें, यह उन्हें प्रेरित करेगा और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेगा.

शाबाश जैसे ऊपरी शब्दों से बचें, क्योंकि ये अस्पष्ट होते हैं और बच्चों को यह समझने में मदद नहीं करते कि आप किस चीज़ की सराहना कर रहे हैं, विशिष्ट और सटीक प्रशंसा का उपयोग बच्चों को यह बताने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप उनके प्रयासों और उपलब्धियों को महत्व देते हैं, उदाहरण के लिए, मुझे यह देखकर बहुत खुशी हुई कि आपने नए बच्चे को खेलों में शामिल किया, आप बहुत दयालु और मिलनसार हैंं.

बच्चों की तुलना दूसरों से करने से बचें और उनका उत्साह बढ़ाएं - हर बच्चा अनूठा होता है, वह अपने ढंग से बढ़ता है और उसकी अपनी प्रतिभाएं होती है, जब उनकी तुलना भाई-बहनों या अन्य बच्चों से की जाती है तो उनमें हीन भावना और आत्म-संदेह पैदा हो सकते हैं, यह तुलना उन्हें निराश, हताश और कम आत्मविश्वासी बना सकती है वे अपनी क्षमताओं पर संदेह करने लगते हैं और गलतियाँ करने से डरने लगते हैं, इसके विपरीत, हमें प्रत्येक बच्चे को उसकी क्षमताओं के अनुसार प्रोत्साहित करना चाहिए, उनकी खूबियों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें अपने ढंग से आगे बढ़ने देना चाहिए.

यदि आप उनके व्यवहार में सुधार लाना चाहते हैं, तो बैठ कर, उनके लक्ष्य तक पहुँचने के लिए उनके शर्तों के अनुसार, समझाएं, न कि उन्हें भाई, बहन या पड़ोसी की तरह व्यवहार करने के उदाहरण दिए जाएं, इससे उनमें हीनता की बजाय स्वयं की भावना विकसित होगी.

बच्चों की एक-दूसरे से तुलना करने से उनके बीच अपने भाई-बहनों के प्रति प्रतिद्वंद्विता विकसित हो सकती है, आप निश्चित रूप से अपने बच्चों के बीच प्रतिस्पर्धा नहीं बल्कि प्यार भरा रिश्ता कायम करना चाहेंगे.

यह सच है कि कई बार माता-पिता का किसी न किसी बच्चे के प्रति थोड़ा पक्षपात हो जाता है लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने बच्चों को यह महसूस न होने दें, उनके साथ समान व्यवहार करें, उनकी बात ध्यान से सुनें और उनकी भावनाओं को समझें, यदि बच्चे आपस में झगड़ रहे हैं तो किसी एक का पक्ष लेने की बजाय निष्पक्ष और तटस्थ रहें.

प्रत्येक बच्चे को स्वयं के लिए जिम्मेदार बनाकर प्राकृतिक जन्म क्रम की प्रवृत्ति को सहयोगात्मक दिशा में मोड़ें, बड़े बच्चों को छोटे बच्चों का प्रभारी बनाने से भाई-बहन की प्रतिद्वंद्विता को बढ़ावा मिलता है, जबकि उन्हें खुद के लिए जिम्मेदार बनाने से उनके व्यक्तित्व और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलता है.

अपने बच्चों की बातें सुनें - बच्चों के माता-पिता होने का मतलब सिर्फ नियम बनाना और उन्हें लागू करना नहीं है, बल्कि अपने बच्चों की समस्याओं को सुनने के लिए मौजूद रहना भी है, आपको बच्चों में रुचि व्यक्त करने और उनके जीवन में शामिल होने में भी सक्षम होना चाहिए, आपको ऐसा माहौल बनाना होगा जहां बच्चे बेझिझक अपनी समस्याएं लेकर आपके पास आ सकें चाहे वे समस्या कितनी भी बड़ी या छोटी क्यों न हों.

अपने बच्चों की बातें पूरे मन से सुनने की आदत डालें, जब वे आपसे बात कर रहे हों तो उनकी तरफ देखें और उन्हें यह दिखाएं कि आप उनकी बात पूरे ध्यान से सुन रहे हैं, ऐसा आप बीच-बीच में अपना सर हिलाकर, "हाँ", "अच्छा", "मैं समझी/समझा" या फिर "क्या हुआ?" बोलकर कर सकते हैं, जब आपके बच्चे आपको कोई बात बता रहे हों तो अपनी बात कहने या कोई रिस्पांस देने की जल्दी न करें, जब आपके बच्चे की बात खत्म हो जाए तो उनकी ही बातों को बीच में से उठाकर फिर अपना रिस्पांस दें, जैसे, "अच्छा तो तुमने अपनी दोस्त के साथ खिलौना शेयर नहीं किया? लेकिन यह तो अच्छी बात नहीं है, तुम्हें अपने दोस्त के साथ खिलोने शेयर करने चाहिए थे.

आप चाहें तो दिन का एक समय अपने बच्चों की बातों के लिए, सोने से पहले, नाश्ते के दौरान या स्कूल से लौटते वक्त निश्चित कर सकते हैं, इस समय में अपना पूरा समय दें और बातचीत के दौरान अपना फोन बंद कर दें, टीवी बंद कर दें और किसी भी अन्य काम से बचें जो आपको विचलित कर सकता है.

अपने बच्चों की बुद्धिमत्ता पर संदेह न करें, जब भी कोई बात गलत या सही होती है तो उसे देखने और समझने का उनका अपना नजरिया होता है, इसलिए उनकी बात सुनकर उनकी बात समझने की कोशिश करें और उनकी सोच को समझें.

यदि आपके बच्चे कहते हैं कि उन्हें आपसे कुछ कहना है, तो इस बात को गंभीरता से लें और उनकी बात सुनने के लिए बाकी सब काम छोड़ दें या ऐसा समय सुनिश्चित करें जब आप वास्तव में उनकी बात सुन सकें.

अपने बच्चों के लिए समय निकालें - आज की व्यस्त दुनिया में, माता-पिता के लिए अपने बच्चों के साथ पर्याप्त समय बिता पाना मुश्किल हो जाता है, लेकिन यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि बच्चों के साथ समय बिताना न केवल उनके विकास और भलाई के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आपके और आपके बच्चों के बीच मजबूत बंधन बनाने का भी एक शानदार ढंग है.

जब आप अपने बच्चों के लिए समय निकालते हैं तो आप उन्हें प्यार, सुरक्षा और अनमोल होने का एहसास दिलाते हैं, यह उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने में मदद करने वाला एक मजबूत भावनात्मक आधार प्रदान करता है, बच्चों के साथ समय बिताने से आपके और उनके बीच विश्वास और संचार मजबूत होता है, यह उन्हें अपनी भावनाओं, विचारों और अनुभवों को आपके साथ साझा करने में अधिक सहज महसूस कराता है.

यदि आपके एक से अधिक बच्चे हैं, तो प्रत्येक बच्चे के साथ अलग-अलग समय बिताएं, अपना समय उनके बीच समान रूप से बांटने का प्रयास करें.

बच्चों के पालन-पोषण में सबसे महत्वपूर्ण पहलू है उनसे प्यार करना, उनका सम्मान करना और उनकी बात सुनना. साथ ही, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि आप उनके माता-पिता हैं और उन्हें सही दिशा दिखाने और जिम्मेदारी सिखाने का दायित्व भी आपका ही है.

यह सच है कि हर बच्चे का अपना व्यक्तित्व और अपनी रुचियां होती हैं, हमें उनके सपनों का सम्मान करना चाहिए और उन्हें अपनी ज़िंदगी के बारे में फैसले लेने की स्वतंत्रता देनी चाहिए.

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम उन्हें बिना किसी रोक-टोक के मनमोजी बनने दें, बच्चों को सीमाओं का ज्ञान होना ज़रूरी है, जिन्हें बचपन से ही हर चीज़ की इजाज़त मिल जाती है और जिनकी हर इच्छा पूरी हो जाती है, वे बड़े होकर सामाजिक नियमों का पालन करने में मुश्किलें महसूस करते हैं.

यदि आप उनके हर अनुरोध को स्वीकार करते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं कि आप अच्छे माता-पिता हैं, कभी-कभी न कहना भी ज़रूरी होता है लेकिन न कहने के साथ-साथ यह भी समझाना ज़रूरी है कि आप ऐसा क्यों कह रहे हैं, केवल 'क्योंकि मैंने ऐसा कह दिया' यह कारण अनुचित व अमान्य है.

बच्चों से बातचीत करें, उनकी भावनाओं को समझें और उन्हें विकल्पों के बारे में बताएं, धीरे-धीरे वे समझ जाएंगे कि ज़िंदगी में हर चीज़ संभव नहीं होती और कुछ नियमों का पालन करना ज़रूरी होता है.

बच्चों के साथ अनमोल पल - आजकल की व्यस्त ज़िंदगी में हम अक्सर छोटी-छोटी खुशियों को अनदेखा कर देते हैं, काम, ज़िम्मेदारियां और सामाजिक दायित्वों के बोझ तले दबे हुए हम भूल जाते हैं कि जीवन का सच्चा सार इन क्षणभंगुर पलों में छिपा हुआ है और इनमें सबसे अनमोल होते हैं हमारे बच्चों के जीवन के खास लम्हे.

क्या आपने कभी सोचा है कि आपने क्या खो दिया है जब आपने अपने बच्चे के साथ पहले दिन स्कूल जाने से मना कर दिया क्योंकि आपको काम पर जाना था? या जब आपने उनके स्कूल के नाटक में शामिल होने से मना कर दिया क्योंकि आप थके हुए थे? या जब आपने उनके साथ होमवर्क करने से मना कर दिया क्योंकि आप फोन देखना चाहते थे?

यह सोचने का समय है, आपने अपने बच्चे के चेहरे पर उस खुशी को देखने का मौका खो दिया है जब वह पहली बार स्कूल गए थे, आपने उस उत्साह को महसूस करने का मौका खो दिया है जब उसने मंच पर अपना पहला प्रदर्शन दिया था, आपने उस खुशी को महसूस करने का मौका खो दिया है जब उसने अपने होमवर्क में सफलता हासिल की थी.

लेकिन अभी भी देर नहीं हुई है, आज से ही शुरुआत करें और अपने बच्चों के जीवन के खास लम्हों को संजोना शुरू करें, उनके साथ समय बिताएं, उनसे प्यार करें और उन्हें बताएं कि वे आपके लिए कितने महत्वपूर्ण हैं उदाहरण के लिए उनके स्कूल के कार्यक्रमों में भाग लें, उनके खेलों को देखें, उनकी प्रस्तुतियों में शामिल हों, और उनके पुरस्कार समारोहों में जाएं.

अपने बच्चों के साथ खास पल बिताने के लिए समय निकालें, उन्हें प्यार और स्नेह दें, और उनके जीवन के खास लम्हों को यादगार बनाएं.

एक बेहतरीन अनुशासक बनें

अच्छे माता-पिता कैसे बनें

1  उचित नियम निर्धारित करें - किसी आदर्श व्यक्ति के नियमों की नकल करने के बजाय ऐसे नियम बनाएं जो बच्चे को खुशी और बेहतर जीवन की ओर ले जाएं, महत्वपूर्ण बात यह है कि ऐसे नियम और दिशानिर्देश निर्धारित करें जो आपके बच्चे को कठोर न लगें, उन्हें बढ़ने में मदद करें, मददगार बनें, उन्हें ऐसा महसूस न कराएं कि वे कुछ गलत किए बिना एक कदम भी नहीं उठा सकते, आदर्श रूप में, आपके बच्चों के दिल में आपके नियमों से जितना डर है, उससे अधिक आपके लिए प्यार होना चाहिए.

बच्चों को उनके कार्यों के परिणामों की स्पष्ट समझ होनी चाहिए, यदि आप उन्हें दंडित करते हैं, तो सुनिश्चित करें कि वे सजा का कारण और अपनी गलती दोनों को समझें, यदि आप स्वयं उनकी गलती को स्पष्ट रूप से नहीं समझाएंगे, तो सजा का वांछित प्रभाव नहीं होगा.

आप न केवल उचित नियम बनाएं बल्कि स्वयं उनका पालन भी करें, छोटी-मोटी शरारतों के लिए कठोर दंड या ऐसे दंड से दूर रहें जो किसी भी तरह से बच्चों को शारीरिक चोट पहुंचाते हैं.

अपने क्रोध को नियंत्रित रखें - शांत और विवेकपूर्ण रहना आवश्यक है जब आप अपने नियमों की व्याख्या या उनका पालन करवा रहे हों तो आप यह चाहेंगे कि आपके बच्चे आपको गंभीरता से लें, न कि आपसे डरें और आपको अनुचित समझें, जाहिर है कि यह एक चुनौती हो सकती है, खासकर जब आपके बच्चे नखरे कर रहे हों या आपको क्रोधित कर रहे हों, लेकिन जब भी आपको लगे कि अब आप अपनी आवाज़ उठाए बिना नहीं रह पाएंगे, तो एक छोटा सा विराम लें या अपनी प्रतिक्रिया से बच्चों को यह महसूस न करवाएं कि आप उनसे नाराज़ हैं.

हम सभी कभी-कभी अपना आपा खो देते हैं और नियंत्रण से बाहर हो जाते हैं, यदि आप कुछ ऐसा कर या कह देते हैं जिसका आपको पछतावा है, तो अपने बच्चों से माफी मांगें. यह उन्हें यह समझने में मदद करेगा कि आपने गलती की है और आप इसके लिए जिम्मेदार हैं, यदि आप अपनी गलती के बाद सामान्य व्यवहार करते हैं, तो वे बाद में इसका अनुसरण करने और गलत व्यवहार को स्वीकार करने की कोशिश करेंगे.

3  बच्चों के लिए सुसंगत नियम बनाए रखें - यह महत्वपूर्ण है कि हर समय एक जैसे नियम लागू किए जाएं, और बच्चों की जिद या विरोध के आगे झुककर नियमों में अपवाद लाने के प्रलोभन से बचा जाए, यदि आप अपने बच्चे को मनमर्जी सिर्फ इसलिए करने देते हैं क्योंकि वरना वे चिड़चिड़े और झल्ला जाएंगे, तो इसका मतलब होगा कि आपके नियमों की नींव कमजोर है और उनमें कोई भी फेरफार कर सकता है, यदि आप खुद को एक से अधिक बार यह कहते हुए महसूस करते हैं कि "ठीक है, पर केवल एक बार," तो आपको अपने बच्चों के लिए और अधिक सुसंगत नियम बनाए रखने की आवश्यकता है.

यदि आपके बच्चों को लगता है कि आपके नियम बार-बार बदलते हैं, तो उन्हें कभी भी नियमों पर टिके रहने के लिए प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता है.

पति-पत्नी एकजुट रहकर मजबूत मोर्चा बनाए रखें - यह महत्वपूर्ण है कि बच्चे को अपने माता-पिता की एकजुटता का अनुभव हो, इसका मतलब यह नहीं है कि आप पति/पत्नी आपके बच्चों से जुड़े मामलों पर 100% सहमत हों, लेकिन इसका अर्थ यह अवश्य है कि आप एक दूसरे के खिलाफ खड़े होने के बजाय, मिलकर समस्याओं का समाधान ढूंढते हैं.

यदि आप एकजुट मोर्चा नहीं बनाए रखते हैं, तो बच्चे यह समझेंगे कि माता पिता में से कोई एक अच्छा है और दूसरा बुरा है, जिसे वे बुरा समझेंगे उनसे वे चालाकी करके काम निकलवाने की कोशिश कर सकते हैं.

उदाहरण के लिए, मान लीजिए आपने अपने बच्चों को रात 9 बजे तक टीवी देखने की अनुमति दी है, यदि आपका बेटा 9 बजे टीवी बंद करने से मना करता है और आपकी पत्नी से अधिक समय मांगता है, तो आपको भी मना कर देना चाहिए, भले ही आप व्यक्तिगत रूप से इससे सहमत हों. यदि आप अपनी पत्नी को हाँ कहने देते हैं, तो आपका बेटा यह सोचेगा कि वह आपकी पत्नी को मनाकर अपनी मर्जी चला सकता है.

बच्चों के सामने कभी भी पति-पत्नी को आपस में नहीं लड़ना चाहिए, अगर बच्चे सो रहे हैं तो धीरे-धीरे बहस करें, माता-पिता का झगड़ा सुनकर बच्चे असुरक्षित और डरे हुए महसूस करते हैं, इसके अलावा बच्चे इसी तरह आपस में बहस करना भी सीखेंगे, उन्हें दिखाएँ कि शांतिपूर्ण ढंग से चर्चा करके भी मतभेदों को सुलझाया जा सकता है.

व्यवस्थित घर बनाएं - बच्चों को यह समझाना महत्वपूर्ण है कि उनके घर और जीवन में एक निश्चित क्रम और तर्क मौजूद है, यह उन्हें सुरक्षित और आत्मविश्वास महसूस कराने में मदद करता है, जिससे वे घर और घर के बाहर दोनों जगह ही खुशहाल जीवन जी पाते हैं.

यह निश्चितता नियमों और योजनाओं के माध्यम से स्थापित की जा सकती है, जैसे कि सुबह उठने, खेलने और सोने का समय, बच्चों को इन नियमों और योजनाओं को बनाने में शामिल करना भी महत्वपूर्ण है, ताकि वे उनका पालन करने के लिए अधिक प्रेरित महसूस करें.

जब बच्चों में यह जानने का गुण आ जाता है कि आगे क्या होने वाला है, तो वे कम चिंतित और अधिक आराम महसूस करते हैं, यह उन्हें नई चीजें सीखने और दुनियां का पता लगाने के लिए प्रोत्साहित करता है.

यदि आप धार्मिक हैं, तो आप अपने बच्चों को अपने धर्म के बारे में सिखाना चाह सकते हैं, इसमें उन्हें आपकी आस्था के सिद्धांतों, धार्मिक ग्रंथों और प्रथाओं के बारे में बताना शामिल हो सकता है, आप उन्हें धार्मिक समुदाय में भी शामिल कर सकते हैं.

यदि आप नास्तिक हैं, तो आपको अपने बच्चों को नास्तिकता के पीछे के तर्क को समझाने की आवश्यकता होगी, आप उन्हें बता सकते हैं कि आप क्यों मानते हैं कि कोई ईश्वर नहीं है और आप जीवन को कैसे देखते हैं.

यह भी महत्वपूर्ण है कि आप अपने बच्चों को खुले विचारों वाले और स्वतंत्र रूप से सोचने वाले बनने के लिए प्रोत्साहित करें, उन्हें अपनी मान्यताओं को चुनने का अधिकार होना चाहिए भले ही वे आपकी मान्यताओं से भिन्न हों.

6  बच्चों में उचित आचरण विकसित करें - आप अपने बच्चे को यह सिखाना चाहेंगे कि वे अपने जीवन में जो भी हासिल करते हैं वह उनके व्यवहारों की वजह से होता है, न कि किसी एक तरह के व्यक्ति बनकर अटके रहने से, उन्हें यह भी समझाएं कि उनके व्यवहार में सुधार की हमेशा गुंजाइश रहती है.

जब आपका बच्चा हानिकारक या गलत तरीके से व्यवहार करता है, तो उसे दृढ़ता से बताएं कि ऐसा व्यवहार स्वीकार्य नहीं है, उन्हें समझाएं कि उनका व्यवहार क्यों गलत है और उन्हें बेहतर विकल्प दिखाएं, उदाहरण के लिए आप कह सकते हैं कि अपने भाई/बहन के साथ मतलबी व्यवहार करना गलत है, उन्हें स्पष्ट रूप से बताएं कि उनका व्यवहार दूसरों को कैसे प्रभावित करता है.

बच्चों को उनकी गलतियों के बारे में बताते समय धैर्यवान और दृढ़ रहें, अपनी अपेक्षाओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त करें और उन्हें नियमों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करें, क्रोधित होने या चिल्लाने के बजाय शांत रहें.

यदि आपका बच्चा सार्वजनिक रूप से गलत व्यवहार करता है, तो उसे शांत तरीके से एक तरफ ले जाएं और फिर उसे समझाएं कि उसका व्यवहार क्यों गलत है, उन्हें बाद में घर पर फिर से इस बारे में बात करने के लिए कहें.

जब आपका बच्चा अच्छा व्यवहार करता है, तो उसकी प्रशंसा करें और उसे पुरस्कृत करें, यह उन्हें अच्छा व्यवहार जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करेगा.

अपने बच्चे को अपनी भावनाओं के बारे में बात करने के लिए प्रोत्साहित करें, उन्हें सिखाएं कि अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के स्वस्थ तरीके कैसे खोजें, जैसे कि बात करना चित्र बनाना या खेल खेलना आदि.

चरित्र निर्माण में अपने बच्चों की सहायता करें

Acche Mata Pita Kaise Bane

1  अपने बच्चों को आत्मनिर्भर बनाएं - बच्चों को सिखाएं कि अलग होना अच्छा है, उन्हें सबके जैसा बनने की ज़रूरत नहीं है, छोटी उम्र से ही उन्हें सही और गलत की समझ दें, ताकि वे ज़्यादातर मामलों में खुद फैसले ले सकें, वे आपके द्वारा प्रेरित एक अनोखे इंसान हैं उन्हें अपनी प्रतिभा और रुचियों को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करें.

जब आपके बच्चे इतने बड़े हो जाएं कि वे खुद फैसले ले सकें, तो उन्हें यह चुनने के लिए प्रोत्साहित करें कि वे किन खेलों या गतिविधियों में भाग लेना चाहते हैं और वे किसके साथ दोस्ती करना चाहते हैं, जब तक आपको ऐसा न लगे कि वे कोई बहुत खतरनाक गतिविधि कर रहे हैं या उन्होंने ऐसा दोस्त चुना है जो उनके लिए अच्छा नहीं है, तब तक उन्हें अपने चुनावों के परिणाम खुद समझने दें.

हर बच्चा अलग होता है और उनका स्वभाव भी आपसे भिन्न हो सकता है, कुछ बच्चे शांत और अंतर्मुखी होते हैं जबकि कुछ अधिक बहिर्मुखी और मिलनसार होते हैं, यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने बच्चे के स्वभाव को स्वीकार करें और उन्हें अपनी मर्जी से निर्णय लेने दें.

बच्चों को यह सिखाना भी महत्वपूर्ण है कि उनके (अच्छे या बुरे) कार्यों के परिणाम होते हैं, चाहे वे अच्छे हों या बुरे, उन्हें अपने अनुभवों से सीखने दें और अपनी गलतियों से बचने दें. 

कुछ काम ऐसे हैं जो बच्चों को स्वयं करने चाहिए, उन्हें ज़िम्मेदारी सौंपें और उन्हें अपनी क्षमताओं पर भरोसा करना सिखाएं उदाहरण के लिए, आप उन्हें अपना बिस्तर ठीक करना, कपड़े मोड़ना या कमरे को साफ करना सिखा सकते हैं.

यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि हर बच्चा अलग होता है और उनकी अपनी ज़रूरतें होती हैं, अपने बच्चे को प्यार और समर्थन दें और उन्हें एक स्वतंत्र और आत्मविश्वासी इंसान बनने में मदद करें.

बच्चों के लिए प्रेरणा बनें: आदर्शों का जीवंत रूप - यदि आप अपने बच्चों से अच्छे व्यवहार की अपेक्षा रखते हैं, तो स्वयं उस व्यवहार या व्यक्तित्व का प्रदर्शन नियमित रूप से करें जो आप उनमें देखना चाहते हैं, सिर्फ मौखिक स्पष्टीकरण के बजाय उन्हें उदाहरणों के माध्यम से सिखाएं, बच्चे आमतौर पर वही सीखते हैं जो वे आसपास देखते और सुनते हैं, जब तक कि वे सचेत प्रयास करके नियमों के सांचे को तोड़ना न सीख लें, आपको अपने बच्चों के लिए एक अप्राप्य आदर्श बनने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन आपको वह व्यक्ति अवश्य बनना चाहिए जो आप उन्हें बनते हुए देखना चाहते हैं.

यह सच है कि गलती करना मानव स्वभाव है, बच्चों को यह सिखाना भी महत्वपूर्ण है कि गलती स्वीकार करना और माफी मांगना उचित व्यवहार है, गलती होना ठीक है, लेकिन माफी मांगकर बच्चों को यह समझाना भी जरूरी है कि गलत व्यवहार स्वीकार्य नहीं है, आप कह सकते हैं, "माँ का इरादा तुम पर चिल्लाने का नहीं था, मैं बस थोड़ा निराश थी," अपनी गलती को स्वीकार करना और माफी मांगना, गलती को नज़रअंदाज़ करने से कहीं बेहतर है, ऐसा न करने पर, बच्चे गलत व्यवहार को उचित समझ सकते हैं और उसे दोहराना शुरू कर सकते हैं.

बच्चों में दयालुता और करुणा का विकास कराएं, बच्चों को अपने आसपास के लोगों को ध्यान से देखने और उनकी कमजोरियों को समझने के लिए प्रोत्साहित करें, यह शारीरिक, भावनात्मक, सामाजिक या आर्थिक कमजोरी हो सकती है, बच्चों को बिना किसी पूर्व धरना या निर्णय के इन कमजोरियों को स्वीकार करना सिखाएं.

सभी लोग, चाहे उनकी क्षमताएं या सामाजिक स्थिति कुछ भी हो, सम्मान के योग्य हैं, बच्चों को कमजोर लोगों के साथ दयालुता और सहानुभूति से पेश आना सिखाना ज़रूरी है, उन्हें यह भी सिखाना चाहिए कि किसी का मजाक उड़ाना या उसकी कमजोरियों का फायदा उठाना गलत है, यदि वे किसी कमजोर व्यक्ति को देखते हैं तो उन्हें प्रेरित करना और उसकी मदद करना सिखाएं, यह मदद छोटी या बड़ी हो सकती है लेकिन हमेशा दिल से होनी चाहिए, दूसरों की मदद करने से हमें खुशी और संतुष्टि मिलती है, यह समझाना भी महत्वपूर्ण है.

यदि आप चाहते हैं कि आपके बच्चे दूसरों के साथ उदारता से व्यवहार करें तो सबसे पहले उन्हें स्वयं उदारता का उदाहरण दिखाना होगा, अपनी चीजों को बच्चों के साथ साझा करें, चाहे वह खिलौने हों, किताबें हों या चॉकलेट आदि.

3  अपने बच्चों की गोपनीयता का सम्मान करें - उनकी निजता का सम्मान करें, जैसा कि आप अपने लिए अपेक्षा करते हैं, यदि आप उन्हें सिखाते हैं कि आपका कमरा एक निजी स्थान है और उन्हें प्रवेश करने से पहले अनुमति लेनी चाहिए, तो यह नियम उनके कमरे पर भी लागू होना चाहिए, उन्हें विश्वास दिलाएं कि कोई उनके कमरे में प्रवेश करते समय उनकी चीजों को नहीं छेड़ेगा या उनकी डायरी नहीं पढ़ेगा, यह उन्हें अपनी सीमाओं का सम्मान करने और दूसरों की गोपनीयता का सम्मान करने के लिए प्रेरित करेगा.

यदि आपके बच्चे आपको उनकी निजी वस्तुओं में दखल देते हुए देखते हैं तो उन्हें आप पर भरोसा करना मुश्किल हो सकता है.

उदाहरण के लिए, जब मैं 10 साल का था, तो मेरी माँ ने मेरे कमरे में प्रवेश करने से पहले हमेशा दस्तक दी, इससे मुझे पता चला कि मेरी निजता महत्वपूर्ण है और मैं उनके साथ अपनी भावनाओं और विचारों को साझा करने में अधिक सहज महसूस करता हूं.

4  स्वस्थ जीवन शैली के लिए बच्चों को प्रेरित करें - अपने बच्चों को एक स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है, जिसमें पौष्टिक भोजन, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद शामिल है, उन्हें एक सकारात्मक और स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करें, लेकिन इतना सख्त न बनें कि उन्हें लगे कि आप उन्हें अपनी मर्जी से खाने, पीने या रहने के लिए मजबूर कर रहे हैं, एक सलाहकार की तरह बनें, तानाशाह नहीं. उन्हें स्वस्थ जीवन शैली का महत्व समझने में मदद करें और उन्हें खुद से सही चुनाव करने दें.

बच्चों को व्यायाम करने के लिए प्रोत्साहित करें, ऐसा करने का एक अच्छा तरीका यह है कि उन्हें कम उम्र में ही किसी ऐसे खेल या गतिविधि से परिचित कराया जाए जिसमें उन्हें आनंद आता हो और जो उनके स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद हो.

यदि आप बच्चों को बार-बार यह समझाने लगते हैं कि कुछ चीजें अस्वस्थ हैं या उन्हें नहीं खानी चाहिए तो वे इसे गलत तरीके से समझ सकते हैं और ऐसा महसूस कर सकते हैं कि आप निंदा कर रहे हैं, यदि यह भावना उनके मन में घर कर जाए, तो वे आपके साथ या आपके आस-पास भोजन करना पसंद नहीं कर सकते हैं और जंक फूड छिपाने भी लग सकते हैं.

स्वस्थ खानपान की आदतें बच्चों में छोटी उम्र से ही विकसित करें, पुरस्कार के रूप में कैंडी या मिठाई देने से बच्चों में गलत आदतें पड़ सकती हैं, क्योंकि बड़े होने पर जब वे खुद को इनाम देना चाहेंगे, तो वे भी यही खाने का विकल्प चुनेंगे, जो मोटापे का कारण बन सकता है, उन्हें कम उम्र से ही स्वस्थ नाश्ता करवाएं, चिप्स के बजाय, उन्हें अंगूर या कोई अन्य पौष्टिक भोजन दें.

छोटी उम्र में डाली गई आदतें जीवन भर बनी रहती हैं, कुछ अच्छी आदतें जो आप अपने बच्चों में विकसित कर सकते हैं, जैसे थाली में परोसा गया पूरा भोजन खत्म करना और एक बार में थोड़ी मात्रा में भोजन परोसना, यदि भोजन कम होगा तो वे और ले सकते हैं, लेकिन यदि अधिक होगा तो वे उसे वापस नहीं रख सकेंगे.

5  शराब के सेवन के बारे में बच्चों से बातचीत: जिम्मेदारी और संयम पर ज़ोर - आप अपने बच्चों से इस बारे में छोटी उम्र में भी बात कर सकते हैं, उन्हें यह स्पष्ट रूप से समझाएं कि शराब का सेवन करने के लिए एक सही उम्र का इंतजार करना होगा और शराब पीकर वाहन चलाने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं, इन विषयों पर खुली और ईमानदार बातचीत न करने से आपके बच्चे जोखिम भरे प्रयोगों या छिपकर किए गए कार्यों में लिप्त हो सकते हैं.

एक बार जब वे शराब पीने की उम्र तक पहुंच जाते हैं तो उन्हें आपसे खुलकर बात करने के लिए प्रोत्साहित करें, सुनिश्चित करें कि वे आपके डर या निराशा के डर से कुछ ऐसा नहीं करते जिसका उन्हें बाद में पछतावा हो जैसे कि शराब पीकर वाहन चलाना, क्योंकि वे आपसे मदद मांगने में संकोच महसूस करते थे.

बच्चों को स्वतंत्र निर्णय लेने और उनके परिणामों का अनुभव करने दें - बच्चों के जीवन का हर फैसला आप न लें, उन्हें अपने द्वारा किए गए चुनावों के परिणामों का सामना करना सीखना चाहिए, आखिरकार उन्हें स्वतंत्र रूप से निर्णय लेना सीखना ही होगा, इसलिए यह बेहतर होगा कि वे यह यात्रा आपके मार्गदर्शन में शुरू करें, ताकि आप नकारात्मक परिणामों को कम कर सकें और उनकी प्रगति को प्रोत्साहित कर सकें.

यह महत्वपूर्ण है कि बच्चे समझें कि उन्हें अपने कार्यों का परिणाम भुगतना होगा, चाहे अच्छा हो या बुरा, इससे उन्हें जिम्मेदार निर्णय लेने वाले और समस्या-समाधानकर्ता बनने में मदद मिलेगी, जो उन्हें एक स्वतंत्र और सफल वयस्क जीवन के लिए तैयार करेगी.

7  बच्चों को गलतियों से सीखने दें: जीवन एक बेहतरीन शिक्षक है - जीवन एक बेहतरीन शिक्षक है, जब तक परिणाम अत्यंत गंभीर न हों, तब तक हमेशा अपने बच्चे को बचाने के लिए दौड़ने की आवश्यकता नहीं है, उदाहरण के लिए, यदि उन्हें छोटी सी चोट लग जाती है तो यह उन्हें दर्द दे सकती है, लेकिन यह उन्हें यह भी सिखाएगी कि धारदार चीजों से सावधान रहना क्यों महत्वपूर्ण है.

यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि आप हमेशा अपने बच्चों की रक्षा नहीं कर पाएँगे, इसलिए जितनी जल्दी वे जीवन के सबक सीख लेंगे उतना ही बेहतर होगा, हालांकि अपने बच्चों को गलतियाँ करते हुए देखना मुश्किल हो सकता है, खासकर जब आप थोड़ी दूरी पर खड़े हों लेकिन लंबे समय में यह आपके और आपके बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होगा.

जब आपका बच्चा अपनी गलतियों से सीख रहा हो, तो उन्हें यह कहकर हतोत्साहित न करें कि 'मैंने तो पहले ही कहा था' इसके बजाय, उन्हें अपनी गलतियों से सीखने और अपने निष्कर्ष निकालने दें.

अपनी बुरी आदतों का त्याग करें - जुआ, शराब और नशीली दवाओं का उपयोग आपके बच्चों के वित्तीय भविष्य को खतरे में डाल सकता है, उदाहरण के लिए, धूम्रपान न केवल पीने वाले के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि आपके आस-पास के लोगों के लिए भी हानिकारक है जो आपके द्वारा छोड़े गए धुएं में सांस लेते हैं, इसके अलावा शराब और नशीली दवाओं के सेवन से न केवल स्वास्थ्य को खतरा हो सकता है बल्कि घर में हिंसा का माहौल भी बन सकता है.

यह सच है कि कभी-कभार शराब का सेवन करना गलत नहीं है, लेकिन जरूरी है कि आप इसका सेवन जिम्मेदारी से सीमित मात्रा में ही करें, अगर आप अधिक मात्रा में शराब का सेवन करते हैं तो यह न सिर्फ आपके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाएगा बल्कि आपके बच्चों के स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, इसके साथ ही यह आपके परिवार में तनाव और संघर्ष भी पैदा कर सकता है.

शराब का सेवन बच्चों के सामाजिक विकास में बाधा उत्पन्न कर सकता है और स्कूल व दोस्तों के साथ सामान्य व्यवहार में समस्याएं पैदा कर सकता है.

अपने बच्चों पर अनुचित अपेक्षाओं का बोझ न डालें - यह उनसे बिल्कुल वैसा व्यवहार कराने से बिल्कुल अलग है जैसा आप उनसे चाहते हैं, अपने बच्चों पर कक्षा में प्रथम आने या गेम जीतने का दबाव डालने के बजाय, उन्हें अच्छी पढ़ाई करने और साहसी बनने के लिए प्रेरित करें, उन्हें अपनी क्षमता के अनुसार सर्वोत्तम प्रयास करने के लिए प्रेरित करें.

आप निश्चित रूप से नहीं चाहते कि आपके बच्चे आपकी अपेक्षाओं के डर से आपसे दूर हो जाएं, आपको उनके जीवन में प्रोत्साहन देने वाला बनना चाहिए, तानाशाह नहीं.

10  कर्तव्य और प्रेम का अनंत सिलसिला - यह जान लें कि माता-पिता का कर्तव्य कभी समाप्त नहीं होता है, आपको भले ही लगे कि अब आपने अपने बच्चों को जीवन में स्थापित कर दिया है, लेकिन ऐसा नहीं है, माता-पिता होने का आपका कर्तव्य जीवन भर चलता रहेगा और हर कदम पर उन्हें आपके उसी प्यार, दुलार और स्नेह की आवश्यकता होगी.

आपके बच्चे हमेशा आपके मार्गदर्शन की तलाश करते रहेंगे और आपके शब्दों से प्रभावित होते रहेंगे, चाहे उनकी उम्र कुछ भी हो, जैसे-जैसे समय बीतता जाएगा आप न केवल अपने माता-पिता होने के कौशल को विकसित करते रहेंगे, बल्कि यह भी सोचते रहेंगे कि एक अच्छे माता-पिता कैसे बनें.

अच्छे माता-पिता बनने के सूत्र

आत्मनिरीक्षण - अपने जीवन से सीखें, गलतियों को न दोहराएं, बच्चों को सुनें और उनकी जरूरतों को प्राथमिकता देंं.

प्रेम और स्वीकृति - बच्चों को प्यार करें, उनकी भावनाओं का सम्मान करें, और उन्हें स्वतंत्र रूप से जीने देंं.

सुरक्षा और मार्गदर्शन - बच्चों को सुरक्षित महसूस कराएं, उन्हें गलत रास्तों से बचाएं और ज़रूरत पड़ने पर मार्गदर्शन करें. 

सकारात्मकता और प्रोत्साहन - बच्चों की प्रशंसा करें, उन्हें प्रोत्साहित करें, और उनमें आत्मविश्वास जगाएं.


बच्चों से खुलकर बात करें, उनकी बातों को ध्यान से सुनें और उनसे दोस्ती करें, आपका प्यार और मार्गदर्शन आपके बच्चों को सफल और खुशहाल जीवन जीने में मदद करेगा.

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निष्कर्ष: अच्छे माता-पिता कैसे बनें 

याद रखें, अच्छे माता-पिता बनने का कोई एक निश्चित तरीका नहीं है, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपने बच्चों से प्यार करें, उनका समर्थन करें और उन्हें जीवन में सफल होने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करें.

अच्छे माता-पिता अपने बच्चों के लिए बिना शर्त प्यार और स्नेह का स्रोत होते हैं, और उन्हें स्वीकार करते हैं, उनकी भावनाओं को समझते हैं और समर्थन करते हैं, चाहे वे कैसी भी हों.

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