पठार किसे कहते हैं और यह कितने प्रकार के होते हैं?

Sakshi
1
पठारों की आकृति, संरचना एवं खनिज संपदा का भूवैज्ञानिक अध्ययन न केवल विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण है, बल्कि समृद्धि और विकास के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करते हैं, इससे हम पृथ्वी के भौतिक विश्लेषण, उपयोग और उनके संसाधनों को समझते हैं, जो हमारे जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं.

इस के लेख के माध्यम से हम पठार किसे कहते हैं, पठार की विशेषताएँ, पठार कैसे बनते हैं, पठारों का वर्गीकरण, पठारों के प्रकार और उनका महत्व आदि के बारे में जानेंगे, कृपया लेख में अंत तक बने रहें.

बिना किसी देरी के, चलिए शुरू करते हैं पठार किसे कहते हैं और यह कितने प्रकार के होते हैं? के बारे में यह महत्वपूर्ण लेख.

TOC

पठार किसे कहते हैं (Pathar kise kahate hain)

पठार एक विशेष प्रकार के भूभाग होते हैं जो आसपास की भूमि से ऊभरे हुए होते हैं और उनकी ऊपरी सतह समतल या ऊबड़-खाबड़ होती है, इन्हें उठी हुई और सपाट भूमि भी कहा जाता है.

सामान्यतः पठार पर्वतों की तुलना में कम ऊँचे होते हैं लेकिन कुछ पठार पर्वतों से ऊँचे भी हो सकते हैं, पठारों का निर्माण भूकंप, भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं और सतह परिवर्तन के परिणामस्वरूप होता है.

पठार किसे कहते हैं और यह कितने प्रकार के होते हैं?

पठारों की विशेषताएँ

पठारों की अनेक विशेषताएँ हैं जिनकी जानकारी इस प्रकार है.


भू आकृति - पठार एक ऐसी भू आकृति है जो आसपास के क्षेत्रों से ऊँची होती है, यह आसपास के मैदानों से ऊँचा और आसपास के पर्वतों से छोटा होता है.

शीर्ष सतह - पठार की शीर्ष सतह समतल या उबड़-खबड़ होती है, कुछ पठारों में घाटियाँ और नदियाँ भी होती हैं.

खुले मेज - पठार एक खुली मेज़ की भांति होता है, जो एक छोर पर पर्वतों और दूसरे छोर पर मैदानों, तटीय क्षेत्रों या पहाड़ों से घिरा होता है.

ऊंचाई - पठार की ऊंचाई निश्चित नहीं होती, यह कुछ सौ मीटर से लेकर कई हजार मीटर तक हो सकती है, ऊंचाई में यह अंतर अलग-अलग पठारों में भिन्न होता है और यह कई सौ मीटर से लेकर कई हजार मीटर तक हो सकता है.

प्रकार - पठारों का निर्माण भूकंप, भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं और सतही परिवर्तनों के परिणामस्वरूप होता है.

विश्व में फैलाव - विश्व भर में कई पठार हैं जिन्हें विभिन्न नामों से जाना जाता है जैसे तिब्बत का पठार, कोलोराडो का पठार, भारत के झारखंड में पाट क्षेत्र आदि. विश्व का सबसे ऊँचा पठार तिब्बती पठार है जो एशिया महाद्वीप में स्थित है.

जलवायु - पठारों की जलवायु विभिन्न प्रकार की होती है, कुछ पठारों में ठंडी जलवायु होती है, जबकि कुछ में गर्म जलवायु होती है, पठारों की जलवायु ऊंचाई, Latitude, और आसपास के जल निकायों से प्रभावित होती है.

वनस्पतियाँ और जीव - पठारों में विभिन्न प्रकार की वनस्पतियाँ और जीव पाए जाते हैं, वनस्पतियाँ और जीव जलवायु, ऊंचाई, और मिट्टी पर निर्भर करते हैं.

आर्थिक महत्व - पठारों में विभिन्न प्रकार के खनिज संसाधन पाए जाते हैं, पठारों में कृषि, पशुपालन और पर्यटन भी महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधियाँ हैं.

पठार का निर्माण कैसे होता है (Pathar ka nirman kaise hota hai)

पठारों का निर्माण कई भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं के संयोजन से होता है, इन प्रक्रियाओं का विस्तृत विवरण नीचे दिया गया है.

धरातल का अवसंवलन और उत्संवलन 

सतह के कुछ हिस्सों के नीचे धंसने और कुछ हिस्सों के ऊपर उठने से पठारों का निर्माण हो सकता है, यह अवसंवलन (सतह के नीचे दबाव) और उत्संवलन (सतह के ऊपर कंपन) के कारण होता है, जैसे दक्कन का पठार, जो लावा प्रवाह के साथ-साथ धरातल के उत्थान के कारण भी बना है.


लावा प्रवाह 

जब किसी समतल क्षेत्र में ज्वालामुखी से लावा निकलता है और सतह पर फैलकर ठंडा हो जाता है, तो लावा जम जाता है और पठार का निर्माण होता है जैसे कोलंबिया का पठार, जो ज्वालामुखी लावा से निर्मित है.


पर्वत निर्माण

पर्वतों के निर्माण के साथ-साथ आसपास के क्षेत्र भी ऊपर उठ जाते हैं, जिससे तलहटी पठारों का निर्माण होता है जैसे तिब्बत का पठार, जो हिमालय पर्वतों के निर्माण के साथ-साथ ऊपर उठा था.


वायुमंडल के प्रभाव

वायुमंडल के प्रभाव के कारण सतह के पत्थर और चट्टानों का अपक्षय होता है, जिससे वे छोटे-छोटे टुकड़ों में बदल जाते हैं. यह मिट्टी का निर्माण करता है जो पठारों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जैसे छोटानागपुर का पठार, जिसकी मिट्टी का निर्माण अपक्षय से हुआ है.


भूसन्नति के प्रभाव

प्राचीन काल में पर्वतों के ऊपरी भाग के घर्षण और अपरदन के कारण वे छोटे हो जाते हैं और बाद में पठारों में विकसित हो जाते हैं उदाहरणतः एशिया माइनर का पठार, जो प्राचीन पर्वतों से विकसित हुआ है.


पठारों का वर्गीकरण (Patharon ka Vargikaran)

भूपटल पर विभिन्न प्रकार की भू-आकृतियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से पठार भी महत्वपूर्ण हैं. भूगर्भीय प्रक्रियाओं और अपरदन के प्रभावों के आधार पर पठारों को विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है लेकिन यहाँ हम पठारों के दो मुख्य वर्गीकरणों पर प्रकाश डालेंगे, उत्पत्ति के आधार पर और अपरदन चक्र के आधार पर.

1. उत्पत्ति के आधार पर 

अंतर्पर्वतीय पठार - ये पठार चारों ओर से ऊँचे पर्वतों से घिरे होते हैं, भूपटल के सबसे ऊँचे, विस्तृत और जटिल पठार इसी श्रेणी में आते हैं. उदाहरण के लिए, तिब्बत का पठार, बोलीविया और पेरू के पठार और एशिया माइनर का पठार.

गिरिषद पठार - ये पठार पर्वतों के आधार पर स्थित होते हैं, एक ओर ऊँचे पर्वतों से घिरे होने के साथ-साथ, दूसरी ओर वे सागर या मैदानों से घिरे होते हैं, जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका का पीडमांट पठार, दक्षिण अमेरिका का पैटागोनिया पठार.

गुम्बदाकार पठार - भूपटल में वलन क्रिया द्वारा गुम्बदनुमा उत्थान के कारण इस प्रकार के पठार बनते हैं, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका का ओजार्क पठार, भारत का छोटानागपुर पठार और रामगढ़ पठार आते हैं.

महाद्वीपीय पठार - ये पठार प्रायः पर्वतीय भागों से दूर, किन्तु सागरीय तटों या मैदानों से घिरे होते हैं, इनकी उत्पत्ति धरातल के ऊपर उठने या लावा के अपरिमित निक्षेप से होती है, जैसे साइबेरिया शील्ड, बाल्टिक या फेनो-स्कैंडिये शील्ड, लारेशियन या कनाडियन शील्ड, ब्राजील शील्ड.

ज्वालामुखी पठार - ज्वालामुखी के निस्सृत लावा के जमाव के कारण बने सपाट विस्तृत भू-भाग को ज्वालामुखी पठार कहते हैं, जैसे भारत का दक्कन का लावा पठार, संयुक्त राज्य अमेरिका का कोलंबिया स्नैक पठार.

2. अपरदन चक्र के आधार पर

तरुण पठार - जिन पठारों पर अपरदन की प्रक्रिया अधिक सक्रिय होती है उन्हें तरुण पठार कहा जाता है. जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका का कोलोरेडो पठार और इदाहो पठार.

प्रौढ़ पठार - जिन पठारों पर अपरदन की प्रक्रिया मध्यम गति से होती है, उन्हें प्रौढ़ पठार कहा जाता है जैसे  संयुक्त राज्य अमेरिका का अप्लेशियन पठार.

जीर्ण पठार - अत्यधिक अपरदन के कारण जिन पठारों की ऊंचाई कम हो जाती है उन्हें जीर्ण पठार कहा जाता है जैसे मध्य राँची का पठार.

पुनर्युवनित पठार - यदि कोई जीर्ण पठार पुनः उभार के कारण ऊंचाई प्राप्त कर लेता है, तो उसे पुनर्युवनित पठार कहा जाता है, जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका का मिसौरी पठार और राँची का पाट-पठार.

पठारों के प्रकार (Patharon ke prakar)

पठार एक विशाल, ऊंचा और समतल भूभाग होता है जो आसपास के क्षेत्र से ऊंचा होता है, पठारों का निर्माण विभिन्न भूगर्भीय प्रक्रियाओं द्वारा होता है, जैसे कि ज्वालामुखी विस्फोट, टेक्टोनिक प्लेटों की गति और अपरदन. पठारों को विभिन्न प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है जिनमें शामिल हैं -

1- ऊंचाई के आधार पर

उच्च पठार -  3,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले पठार, जैसे तिब्बत का पठार.

मध्य पठार -  1,000 से 3,000 मीटर ऊंचाई वाले पठार, जैसे दक्कन का पठार.

निम्न पठार - 1,000 मीटर से कम ऊंचाई वाले पठार, जैसे कोलंबिया का पठार. 


2- ढलान के आधार पर

अंतर्देशीय पठार -  सभी तरफ से ढलान वाले पठार, जैसे तिब्बत का पठार.

तटीय पठार -  एक तरफ समुद्र से घिरे पठार, जैसे दक्कन का पठार.

3- जलवायु के आधार पर

शुष्क पठार -  कम वर्षा वाले पठार, जैसे अरब का पठार.

आर्द्र पठार -  उच्च वर्षा वाले पठार, जैसे मेक्सिको का पठार.


4- निर्माण के आधार पर

ज्वालामुखी पठार -  ज्वालामुखी विस्फोट से निर्मित पठार, जैसे कोलंबिया का पठार.

अपरदन पठार -  अपरदन द्वारा निर्मित पठार, जैसे कोलोराडो पठार.

टेक्टोनिक पठार -  टेक्टोनिक प्लेटों की गति द्वारा निर्मित पठार, जैसे तिब्बत का पठार.


विश्व के प्रमुख पठार (vishv ke pramukh pathar)

तिब्बत का पठार - यह विश्व का सबसे ऊँचा पठार है, जो समुद्र तल से औसतन 4,900 मीटर (16,073 फीट) की ऊँचाई पर स्थित है, यह पठार मध्य एशिया में स्थित है और इसका क्षेत्रफल 2.5 मिलियन वर्ग किलोमीटर (968,000 वर्ग मील) है, तिब्बत का पठार हिमालय पर्वत श्रृंखला से घिरा हुआ है और यह सिंधु नदी, ब्रह्मपुत्र नदी और सलवीन नदी सहित कई प्रमुख नदियों का उद्गम स्थल है.

बोलिविया का पठार - यह दक्षिण अमेरिका में स्थित एक ऊँचा पठार है, जिसकी औसत ऊँचाई 4,000 मीटर (13,123 फीट) है, यह पठार एंडीज पर्वत श्रृंखला से घिरा हुआ है और इसका क्षेत्रफल 1.1 मिलियन वर्ग किलोमीटर (425,000 वर्ग मील) है.

कोलोराडो पठार - यह संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित एक ऊँचा पठार है, जिसकी औसत ऊँचाई 2,000 मीटर (6,562 फीट) है, यह पठार रॉकी पर्वत श्रृंखला से घिरा हुआ है और इसका क्षेत्रफल 337,000 वर्ग किलोमीटर (130,000 वर्ग मील) है, कोलोराडो पठार दुनिया के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है.

अरब का पठार - यह पश्चिमी एशिया में स्थित एक ऊँचा पठार है, जिसकी औसत ऊँचाई 800 मीटर (2,625 फीट) है, यह पठार हिजाज़ पर्वत श्रृंखला से घिरा हुआ है और इसका क्षेत्रफल 2.5 मिलियन वर्ग किलोमीटर (968,000 वर्ग मील) है, अरब का पठार दुनिया का सबसे बड़ा रेगिस्तान है.

दक्कन का पठार - यह भारत में स्थित एक ऊँचा पठार है, जिसकी औसत ऊँचाई 600 मीटर (1,969 फीट) है, यह पठार विंध्य पर्वत श्रृंखला से घिरा हुआ है और इसका क्षेत्रफल 1.9 मिलियन वर्ग किलोमीटर (730,000 वर्ग मील) है, दक्कन का पठार कई प्राचीन मंदिरों और किलों का घर है.

मंगोलिया का पठार - यह मध्य एशिया में स्थित एक ऊँचा पठार है, जिसकी औसत ऊँचाई 1,300 मीटर (4,265 फीट) है, यह पठार गोबी रेगिस्तान से घिरा हुआ है और इसका क्षेत्रफल 1.5 मिलियन वर्ग किलोमीटर (580,000 वर्ग मील) है, मंगोलिया का पठार दुनिया का सबसे बड़ा घास का मैदान है.

ईरान का पठार - यह पश्चिमी एशिया में स्थित एक ऊँचा पठार है, जिसकी औसत ऊँचाई 1,200 मीटर (3,937 फीट) है, यह पठार ज़ाग्रोस पर्वत श्रृंखला से घिरा हुआ है और इसका क्षेत्रफल 1.2 मिलियन वर्ग किलोमीटर (460,000 वर्ग मील) है.

अनातोलिया का पठार - यह तुर्की में स्थित एक ऊँचा पठार है, जिसकी औसत ऊँचाई 800 मीटर (2,625 फीट) है, यह पठार टोरोस पर्वत श्रृंखला से घिरा हुआ है और इसका क्षेत्रफल 750,000 वर्ग किलोमीटर (290,000 वर्ग मील) है.

एथियोपिया का पठार - यह पूर्वी अफ्रीका में स्थित एक ऊँचा पठार है, जिसकी औसत ऊँचाई 2,500 मीटर (8,202 फीट) है, यह पठार नील नदी के जलग्रहण क्षेत्र का हिस्सा है और इसका क्षेत्रफल 1.1 मिलियन वर्ग किलोमीटर (425,000 वर्ग मील) है.

मैक्सिको का पठार - यह उत्तरी अमेरिका में स्थित एक ऊँचा पठार है, जिसकी औसत ऊँचाई 1,800 मीटर (5,906 फीट) है, यह पठार सिएरा माद्रे पर्वत श्रृंखला से घिरा हुआ है और इसका क्षेत्रफल 1.2 मिलियन वर्ग किलोमीटर (460,000 वर्ग मील) है.

ब्राजील का पठार - यह दक्षिण अमेरिका में स्थित एक ऊँचा पठार है, जिसकी औसत ऊँचाई 800 मीटर (2,625 फीट) है, यह पठार एंडीज पर्वत श्रृंखला से घिरा हुआ है और इसका क्षेत्रफल 5.2 मिलियन वर्ग किलोमीटर (2 मिलियन वर्ग मील) है, ब्राजील का पठार अमेज़ॅन वर्षावन का हिस्सा है.

कजाकिस्तान का पठार - यह मध्य एशिया में स्थित एक ऊँचा पठार है, जिसकी औसत ऊँचाई 300 मीटर (984 फीट) है, यह पठार टियान शान पर्वत श्रृंखला से घिरा हुआ है और इसका क्षेत्रफल 2.7 मिलियन वर्ग किलोमीटर (1 मिलियन वर्ग मील) है, कजाकिस्तान का पठार दुनिया का सबसे बड़ा अनाज उत्पादक क्षेत्रों में से एक है.

स्पेन का पठार - यह दक्षिण-पश्चिमी यूरोप में स्थित एक ऊँचा पठार है, जिसकी औसत ऊँचाई 660 मीटर (2,165 फीट) है, यह पठार पायरेनीज पर्वत श्रृंखला से घिरा हुआ है और इसका क्षेत्रफल 500,000 वर्ग किलोमीटर (190,000 वर्ग मील) है.

तिब्बत का पठार - यह मध्य एशिया में स्थित एक ऊँचा पठार है, जिसकी औसत ऊँचाई 4,900 मीटर (16,073 फीट) है, यह पठार हिमालय पर्वत श्रृंखला से घिरा हुआ है और इसका क्षेत्रफल 2.5 मिलियन वर्ग किलोमीटर (968,000 वर्ग मील) है, तिब्बत का पठार दुनिया का सबसे ऊँचा पठार है और इसे दुनिया की छत के रूप में जाना जाता है.

पठारों का महत्व

पठारों का भौगोलिक और सामाजिक-आर्थिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है जो इस प्रकार हैं.

खनिज संसाधन - पठारों में विभिन्न प्रकार के खनिज संसाधनों का भंडार होता है, यहां से लोहा, तांबा, मैग्नीशियम, निकेल, जस्ता आदि धात्विक खनिज प्राप्त होते हैं, जो विभिन्न उद्योगों के लिए उपयुक्त होते हैं, इसके साथ ही पठारों में कोयला, तेल, अभ्रक, यूरेनियम आदि अधात्विक खनिज भी पाए जाते हैं.

जल विद्युत उत्पादन - पठारों में उच्चतम स्तर पर चट्टानें और शिखर होते हैं जो नदियों की प्रवाह और जल विद्युत उत्पादन के लिए अनुकूल जगहें प्रदान करते हैं, ये जल विद्युत उत्पादन के लिए हैड्रोइलेक्ट्रिक प्लांट्स के निर्माण में उपयोगी होते हैं.

जलवायु के प्रभाव - पठारों के ऊँचे भागों में ठंडी जलवायु बनती है जो खेती और वनस्पतियों के उत्पादन में फायदेमंद होती है, ये क्षेत्र विशेष रूप से उन फसलों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं जो ठंडी मौसम की जलवायु को पसंद करती हैं.

भूकंपों के कारण - पठारों में कुछ क्षेत्र भूकंपों के कारण अधिक दर्दार रहते हैं, जिससे भूमि प्लेटें टूट सकती हैं और भूकंप उत्पन्न हो सकते हैं.

पर्यटन - पठारों के ऊँचे भागों में प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण, और विभिन्न प्रकार के वनस्पतियां और जीव पाए जाते हैं, ये पर्यटन के लिए आकर्षक स्थान होते हैं, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देते हैं.

कृषि - पठारों में विभिन्न प्रकार की मिट्टी और जलवायु पाई जाती है, जो विभिन्न प्रकार की फसलों के लिए उपयुक्त होती है, पठारों में गेहूं, मक्का, चावल, फल, सब्जियां और अन्य फसलों का उत्पादन किया जाता है.

वनस्पतियां और जीव - पठारों में विभिन्न प्रकार की वनस्पतियां और जीव पाए जाते हैं, पठारों में घने जंगल, घास के मैदान और पहाड़ी वनस्पतियां पाई जाती हैं, पठारों में विभिन्न प्रकार के जानवर, पक्षी, और सरीसृप पाए जाते हैं.

सांस्कृतिक महत्व - पठारों में विभिन्न प्रकार की संस्कृतियां और परंपराएं पाई जाती हैं, पठारों में रहने वाले लोग विभिन्न प्रकार की भाषाएं बोलते हैं और विभिन्न प्रकार के त्योहार मनाते हैं.

यह लेख भी पढ़ें -

FAQ Section; pathar kise kahate hain हिंदी में

प्रश्न - पठार को English में क्या कहते हैं?
उत्तर - पठार को इंग्लिश में Plateau कहते हैं.

प्रश्न - पठार का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर - पठार को उच्च मैदान या Tableland भी कहा जाता है.

प्रश्न - भारत का सबसे ऊंचा पठार कौन सा है?
उत्तर - भारत का सबसे ऊँचा पठार दक्कन का पठार है इस पठार को प्रायद्वीपीय पठार के नाम से भी जाना जाता है. यह बेहद ही विशाल पठार है, इस पठार में देश के 8 राज्य स्थित हैं.

प्रश्न - विश्व का सबसे बड़ा पठार कहां स्थित है?
उत्तर - विश्व का सबसे बड़ा और सबसे ऊंचा पठार तिब्बती पठार है.

प्रश्न - पठार का सही अर्थ क्या है?
उत्तर - पठार एक विशाल, ऊंचा और समतल भूभाग होता है जो आसपास के क्षेत्र से ऊंचा होता है, पठारों का निर्माण विभिन्न भूगर्भीय प्रक्रियाओं द्वारा होता है.

निष्कर्ष: पठार किसे कहते हैं

पठार धरती की अनोखी भौगोलिक विशेषता हैं, जो अपनी ऊंचाई, ढलान और सतह भिन्नता से वैज्ञानिकों और पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, पठारों का अध्ययन हमें धरती के निर्माण और विकास की जानकारी देता है.

इस लेख में आपने जाना कि पठार किसे कहते हैं, पठार की विशेषताएं, पठारों का निर्माण कैसे होता है, पठारों के वर्गीकरण, पठारों का प्रकार और इनके महत्व आदि.

उम्मीद है आपको पठार किसे कहते हैं और यह कितने प्रकार के होते हैं? से संबंधित यह जानकारी पसंद आई होगी. कृप्या इसे अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर भी शेयर करें.

एक टिप्पणी भेजें

1 टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें